DELED Cognition, Learning & the Socio-Cultural Context Solved Paper 2022

D.El.Ed 2nd Year Exam July-2022 Set-A

Cognition, Learning & the Socio-Cultural Context
संज्ञान, अधिगम तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ

1. ‘व्यवहारवाद’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर – साधारण भाषा में हम कह सकते हैं कि व्यवहारवाद (Behaviourism) एक आवृत्ति या दृष्टिकोण है। व्यवहार वह होता है जिसे वस्तुएं करती हैं। व्यवहारवाद इसी धारणा पर आधारित है तथा इसका लक्ष्य है- व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना।
व्यवहारवाद एक मूल्य-निरपेक्ष अवधारणा है। यह व्यवहार को अपने अध्ययन, अवलोकन, व्याख्या तथा निष्कर्ष का आधार मानकर चलती है। इसके अन्तर्गत सामाजिक अनुसंधान से सम्बन्धित प्रत्येक प्रकार की वैज्ञानिक सामग्री शामिल हैं जो व्यवहार से सम्बन्धित होती है। यह राजनीति विज्ञान में क्रान्तिकारी विचारों को जन्म देने वाला दृष्टिकोण है।

2. बुद्धि का द्वि-कारक सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर – स्पीयरमैन ने इस द्वि-कारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) को प्रस्तुत किया। उसने अपने इस सिद्धांत में बुद्धि के दो कारक बताये हैं। इस सिद्धांत में भी सह-सम्बन्ध की तकनीक का प्रयोग किया गया था। इन दो कारकों में पहले कारक को ‘G’ कारक कहा गया है तथा दूसरे कारक को ‘S’ कारक के रूप में प्रस्तुत किया। ‘G’ कारक को सामान्य कारक (General Factor) तथा ‘S’ कारक को विशिष्ट कारक (Specific Factor) की संज्ञा दी गई हैं। किसी कार्य को सफल रूप से सम्पन्न करने के लिए दोनों सामान्य और विशिष्ट कारकों की आवश्यकता होती है। प्रत्येक बौद्धिक कार्य में ‘G’ और ‘S’ दोनों ही भाग लेते हैं।
स्पीयरमैन के अनुसार, विभिन्न मानसिक कार्य एक दूसरे से सह-सम्बन्धित होते हैं, अर्थात् एक मानसिक योग्यता पर प्राप्त अंक दूसरी मानसिक योग्यता पर प्राप्त अंकों से सह-सम्बन्धित होते हैं। स्पीयरमैन के अनुसार ही मानसिक कार्यों में सम्पन्नता का शारीरिक कार्यों के कौशलों से नकारात्मक सह-सम्बन्ध (Negative Correlation) होता है। स्पीयरमैन के निष्कर्ष के अनुसार, ‘सकारात्मक सह-सम्बन्ध’ (Positive Correlation) से अभिप्राय है वृद्धि के ‘G’ कारक का क्रियाशील होना।

3. छोटे बच्चे सम्प्रेषण कैसे करते हैं ?
उत्तर – सम्प्रेषण (Communication) शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को चलाने के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, चाहे वह सम्प्रेषण औपचारिक हो या अनौपचारिक हो। छोटे बच्चे अशाब्दिक (Non verbal) संप्रेषण करते है, जिसमे वे चेहरे के हावभाव, शारीरिक मुद्राएं और हाव-भाव से अपनी बातों को दुसरो को समझाते हैं। बिना कोई शब्द बोले या बिना कोई आवाज सुने बच्चा संदेश समझ जाता है।

4. सामाजिक अधिगम का अर्थ समझाइए।
उत्तर – प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning) ही सामाजिक अधिगम (Social Learning) कहलाता है। अधिगम के इस रूप को पहले ‘अनुकरण’ कहा जाता था। इस प्रकार के अधिगम में व्यक्ति सामाजिक व्यवहारों को सीखता है, इसीलिए इसे सामाजिक अधिगम कहा जाता है। हमारे सम्मुख ऐसी अनेकों सामाजिक स्थितियाँ आती हैं जिनमें यह ज्ञात नहीं रहता कि हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए। ऐसी स्थिति में हम दूसरे व्यक्तियों के व्यवहारों का प्रेक्षण (Observation) करते हैं और उनकी तरह ही व्यवहार करने लगते हैं। इस प्रकार के अधिगम को ‘मॉडलिंग’ (Modelling) भी कहा जाता है। बच्चे अधिकांश सामाजिक व्यवहार प्रौढ़ों का प्रेक्षण तथा उनकी नकल करके सीखते हैं। कपड़े पहनना, बालों को सँवारने की शैली और समाज में कैसे रहा जाये, यह सब दूसरों को देखकर सीखा जाता है।

5. ‘भाषा एक कलातथ्य है।’ संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर – भाषा एक कलात्मक और सामाजिक प्रणाली है जिसके द्वारा मनुष्य विचारों, भावनाओं और ज्ञान को व्यक्त करता है। यह मनुष्यों के बीच संचार का माध्यम होती है जिससे समाज, संस्कृति और संघर्ष को समझा जा सकता है। भाषा के माध्यम से हम अपनी विचारों, भावनाओं, अनुभवों और ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करते हैं। इसलिए, भाषा को कला के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि इसमें समय, स्थान, संगीत, रंग, शैली, उच्चारण, व्याकरण, शब्दावली आदि के रूप में विभिन्न तत्व होते हैं जो भाषा को रंगीन और सुंदर बनाते हैं।

6. भाषा के संदर्भ में ‘बारी लेने’ या ‘टर्न टेकिंग’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – एक ‘बारी’ (Turn) वह समय होता है जब कोई स्पीकर बोल रहा होता है और बारी-लेने (Turn-Taking) यह जानने का कौशल है कि वार्तालाप में ‘बारी’ को कब शुरू किया जाये और कब संपन्न किया जाये। किसी भी बोले गये वार्तालाप कार्य में यह एक महत्त्वपूर्ण संगठनात्मक उपकरण (Tool) होता है। टर्न टेकिंग सामान्यतः वार्तालाप में एक अवलोकित प्रक्रम है। इसमें एक पार्टी वार्ता करती है, जबकि दूसरे सुनते हैं। इसका वर्णन और विश्लेषण एक महत्त्वपूर्ण समस्या है जिसका उपचार भाषा के व्यवहारवाद में किया गया है।
उदाहरणार्थ- किसी टर्न या बारी के समाप्त होने का संकेत स्पीकर या बोलने वाला व्यक्ति अपनी आवाज की ‘पिच’ (Pitch) या वॉल्यूम (Volume) को अपने कथन के अंत में धीमा कर देता है। कक्षा-कक्ष में कई विधियां हैं जिनके द्वारा स्पीकर बारी-लेने की प्रक्रिया की व्यवस्था कई प्रकार से करते हैं। ये विधियां विभिन्न संस्कृतियों में भिन्न होती है। शारीरिक भाषा और हाव-भावों का भी प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार कई बार ‘आप जानते हैं (You know), आह (Ah) आदि शब्दों का प्रयोग भी करते हैं। भाषा शिक्षण में व्याकरण संरचाएं, उच्चारण आदि का शिक्षण कराया जाता है।

7. अच्छे ‘वार्तालाप’ की विशेषताएँ कौन-सी होती हैं ?
उत्तर –
• अच्छे वार्तालाप (Conversation) में समय का संगठन होता है, जिससे हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का समय मिलता है और सुनने का समय भी मिलता है।
• अच्छे वार्तालाप में संवेदनशीलता होती है, जिससे हर व्यक्ति को आपसी सम्बंधों को समझने और समर्थन करने का मौका मिलता है।
• अच्छे वार्तालाप में सुसंगतता होती है, जिससे सभी भागीदारों को आपस में मेल खाने का अवसर मिलता है।
• अच्छे वार्तालाप में सम्मान की भावना होती है, जिससे हर व्यक्ति को आपसी मतभेदों को समझने और समझौता करने का योग्यता मिलती है।
• अच्छे वार्तालाप में समर्थन की भावना होती है, जिससे हर व्यक्ति को आपसी समझदारी और सहयोग का अनुभव मिलता है।
• अच्छे वार्तालाप में प्रतिक्रिया की प्रणाली होती है, जिससे हर व्यक्ति को अपने विचारों को साझा करने और प्रतिक्रिया प्राप्त करने का मौका मिलता है।

8. ‘निर्मितिवाद’ क्या है ? निर्मितिवाद के लाभ क्या है ?
उत्तर – निर्मितिवाद (Constructivism) एक शिक्षा सिद्धांत है जो कहता है कि ज्ञान और अर्थ का निर्माण व्यक्ति के सामरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रयासों के माध्यम से होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान व्यक्ति के पूर्वज्ञान, अनुभव, संवेदनशीलता, सामरिकता और संघर्षों के माध्यम से समझाया जा सकता है। निर्मितिवाद में बालक स्वयं के द्वारा कार्य करता है और कर के वह सीखता है और इस प्रकार से सिखा गया ज्ञान उसके मन मस्तिष्क में बैठ जाता है अर्थात स्थाई हो जाता है। निर्मितिवाद अधिगम सिद्धांत बालक को सक्रिय अधिगम कर्ता मानता है।
निर्मितिवाद के लाभ निम्नलिखित हैं :
• समग्र ग्रहण – निर्मितिवाद के माध्यम से शिक्षा में छात्रों को समग्रता की अनुभूति होती है। छात्रों को अपने पूर्वज्ञान, अनुभव और सामरिकता के माध्यम से नए ज्ञान को समझने का अवसर मिलता है।
• सक्रियता – निर्मितिवाद के माध्यम से शिक्षा में छात्रों को सक्रिय भागीदारी का मौका मिलता है। छात्रों को अपने विचारों, समस्याओं और हल के लिए समर्पित होने का अवसर मिलता है।
• समस्या-समाधान – निर्मितिवाद के माध्यम से शिक्षा में छात्रों को समस्याओं को समझने और हल के लिए सोचने की क्षमता मिलती है। छात्रों को समस्याओं के समाधान के लिए सही प्रश्न पूछने और विचार करने की प्रेरणा मिलती है।
• सहयोग – निर्मितिवाद के माध्यम से शिक्षा में छात्रों को सहयोग करने की क्षमता मिलती है। छात्रों को साथ मिलकर कार्य करने, अनुभवों और विचारों को साझा करने का अवसर मिलता है।
• सम्प्रेषण – निर्मितिवाद के माध्यम से शिक्षा में छात्रों को अपने विचारों, अनुभवों और ज्ञान को सम्प्रेषित करने की क्षमता मिलती है। छात्रों को सम्प्रेषण के माध्यम से अपनी समझ, समस्या-समाधान और सहयोग को समर्थित करने का अवसर मिलता है।
निर्मितिवाद के लाभ छात्रों की सक्रियता, समस्या-समाधान क्षमता, सहयोग और सम्प्रेषण को बढ़ाते हैं, जो उनके शैक्षिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण होते हैं।

9. वाइगोत्सकी के सिद्धान्त से परिचित कराएँ।
उत्तर – वाइगोत्सकी का सिद्धांत भी एक शिक्षा सिद्धांत है जो कहता है कि ज्ञान और अर्थ का निर्माण सामाजिक प्रयासों के माध्यम से होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, छात्रों को सहयोग, संवेदनशीलता और सामरिकता के माध्यम से नए ज्ञान का निर्माण करने का मौका मिलता है।
वाइगोत्सकी के सिद्धांत में छात्रों को संघर्ष, सहयोग, समस्या-समाधान और सम्प्रेषण के माध्यम से सीखने का महत्वपूर्ण रोल होता है। छात्रों को अपने प्रयासों के माध्यम से समस्याओं को हल करने का अवसर मिलता है और उन्हें अपने विचारों को समझाने और सम्प्रेषित करने का अवसर भी मिलता है।
वाइगोत्सकी के सिद्धांत के अनुसार, छात्रों को समस्याओं को समझने, सही प्रश्न पूछने, सहयोग करने, समझौता करने और समस्या-समाधान करने की क्षमता मिलती है। इसके अलावा, छात्रों को सम्प्रेषण के माध्यम से अपनी समझ, विचार और अनुभवों को साझा करने का मौका भी मिलता है।
वाइगोत्सकी के सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य छात्रों के सामाजिक विकास को बढ़ाना है। इसके माध्यम से छात्रों को सामाजिक संबंध, सहयोग, समस्या-समाधान क्षमता और सम्प्रेषण की महत्वपूर्ण नवीनता मिलती है। यह सिद्धांत शिक्षा में छात्रों की सक्रियता, सहयोग, समस्या-समाधान क्षमता और सम्प्रेषण को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है।

10. ‘अवधान’ क्या होता है ? इसकी विशेषताएँ क्या होती हैं ?
उत्तर – अवधान (Attention) एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘सतर्क’ या ‘चौकस’।
इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं :
• सतर्कता – अवधानता का मतलब होता है कि व्यक्ति जागरूक और सतर्क हो, अपने आसपास के घटनाओं और परिस्थितियों का ध्यान रखे।
• संकेतों की पहचान – अवधानता के साथ, व्यक्ति को संकेतों की पहचान करने की क्षमता होनी चाहिए। इससे वह समय पर और सही निर्णय ले सकता है।
• मनोयोग – अवधानता मनोयोग की एक प्रकार है, जिसमें व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित कर सकता है और उसे एकाग्र कर सकता है।
•प्रतिस्पर्धा – अवधान व्यक्ति प्रतिस्पर्धा में सफलता प्राप्त करने की क्षमता रखता है, क्योंकि वह अपने प्रतियोगियों की क्रियाओं और चेष्टाओं का ध्यान रखता है।
• सुरक्षा – अवधानता सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण पहलू होती है, क्योंकि वह व्यक्ति को अपने आसपास के खतरों का पता चलाने में मदद करती है।
• समर्पण – अवधानता समर्पण की एक महत्वपूर्ण गुण होती है, क्योंकि वह व्यक्ति को अपने कार्यों में पूर्णता के साथ समर्पित होने की क्षमता देती है।
• ध्यान – अवधानता ध्यान की एक प्रकार होती है, जिससे व्यक्ति अपने काम में संगठित और एकाग्र रह सकता है।
• समय प्रबंधन – अवधानता समय प्रबंधन की महत्वपूर्ण एक कौशल है, क्योंकि वह व्यक्ति को समय की मांग को पूरा करने में मदद करती है।
• संवेदनशीलता – अवधानता संवेदनशीलता की एक प्रकार होती है, जिससे व्यक्ति अपने आसपास के लोगों की भावनाओं और जरूरतों को समझ सकता है।
• समाधान – अवधानता समाधान की क्षमता को प्रोत्साहित करती है, क्योंकि वह व्यक्ति को समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में मदद करती है।

11. ‘बुद्धि’ की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – बुद्धि (Intelligence) एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘बुद्धिमान’ या ‘बुद्धिशाली’।
इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं :
• ज्ञान – बुद्धि के साथ, व्यक्ति को गहन ज्ञान की प्राप्ति होती है। वह समस्याओं को समझने, नए और समृद्ध विचारों का विकास करने में सक्षम होता है।
• विवेक – बुद्धि व्यक्ति को विवेक की प्राप्ति करने में मदद करती है, जिससे वह सही और गलत के बीच अंतर कर सकता है।
• समझ – बुद्धि समझ की प्राप्ति करने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति अपने आसपास के घटनाओं और परिस्थितियों को समझ सकता है।
• निर्णय – बुद्धि व्यक्ति को सही और समय पर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
• बुद्धिमान – बुद्धि व्यक्ति को बुद्धिमान बनाती है, जिससे वह अपने कार्यों को समय पर पूरा कर सकता है।
• प्रतिभा – बुद्धि प्रतिभा की प्राप्ति करने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकता है।
• समाधान – बुद्धि समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति को उचित और प्रभावी समाधान प्राप्त करने की क्षमता होती है।
• अनुभव – बुद्धि व्यक्ति को अनुभवों की समझ होती है, जिससे वह अपने जीवन के महत्वपूर्ण घटनाओं से सीख सकता है।
• निरंतरता – बुद्धि व्यक्ति को निरंतरता की प्राप्ति करने में मदद करती है, जिससे वह अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समर्पित रह सकता है।
• सुरक्षा – बुद्धि सुरक्षा की प्राप्ति करने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति खुद को आपदाओं से बचा सकता है।

12. बालकों में सृजनात्मकता को आप कैसे बढ़ावा देंगे ?
उत्तर – बालकों में सृजनात्मकता (Creativity) को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कुछ उपाय हो सकते हैं :
• स्थिरता और समर्पण का माहौल बनाएं – बालकों को स्थिरता और समर्पण की भावना के साथ गतिविधियों में शामिल करें। इसके लिए, उन्हें स्कूल, घर या समुदाय में कला, संगीत, नाटक, रंगमंच, लेखन, पेंटिंग, ग्राफिक डिजाइन आदि के कोर्सेज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
• विचारों को प्रोत्साहित करें – बालकों को अपने विचारों को स्वतंत्रता से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें विभिन्न विषयों पर लिखने, वाद-विवाद में हिस्सा लेने, समाचार पत्र या ब्लॉग लेखन के माध्यम से अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित करें।
• नए और समृद्ध अनुभव प्रदान करें – बालकों को नई और समृद्ध अनुभव प्रदान करने के लिए कैंप, मुद्रा, साहित्य, कला, विज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामुदायिक सेवा, आदि में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें।
• सही मार्गदर्शन प्रदान करें – बालकों को सही मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए उन्हें मेंटर या गुरु के साथ जोड़ें। इससे उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए सही मार्गदर्शन मिलेगा।
• संगठनात्मक कौशल विकसित करें – बालकों को संगठनात्मक कौशल विकसित करने के लिए समय प्रबंधन, संगठन, टीम वर्क, प्रोजेक्ट प्लानिंग, आदि में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें।
• प्रस्तुति कौशल को सुधारें – बालकों को प्रस्तुति कौशल को सुधारने के लिए संवाद, भाषण, प्रेजेंटेशन, आदि में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
• उत्प्रेरणा प्रदान करें –बालकों को उत्प्रेरणा प्रदान करने के लिए उन्हें सफलता की कहानियों, महान व्यक्तियों की जीवनी, मोटिवेशनल संवाद आदि सुनाएं।
• स्वतंत्रता और समर्थन प्रदान करें – बालकों को स्वतंत्रता और समर्थन प्रदान करें, ताकि वे अपनी सृजनात्मकता को स्वतंत्रता से व्यक्त कर सकें। उन्हें अपने विचारों, रचनाओं, कला, संगीत, आदि को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की स्वतंत्रता दें।

13. ‘अभिरुचि’ शब्द का अर्थ समझाइए। अभिरुचि की विशेषताएँ क्या होती हैं ?
उत्तर – अभिरुचि (Aptitude) एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘रुचि’ या ‘प्रेम’। यह एक ऐसी स्थिति है जब किसी व्यक्ति को किसी विषय, कला, गतिविधि या चीज में आकर्षण होता है और उसे उसमें रुचि पैदा होती है।
अभिरुचि की कुछ मुख्य विशेषताएं हैं :
• समर्पितता – अभिरुचि वाले व्यक्ति को उसे प्रिय विषय में समर्पित होने की इच्छा होती है। वह उसे समय, मेहनत, और संघर्ष के साथ प्राप्त करने के लिए तत्पर रहता है।
• स्वतंत्रता – अभिरुचि के साथ आने वाले व्यक्ति को उसे प्रिय विषय में स्वतंत्रता मिलती है। वह अपने विचारों, रचनाओं, और नए आदेशों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकता है।
• आनंद – अभिरुचि के साथ जुड़े व्यक्ति को उसे प्रिय विषय में आनंद मिलता है। वह उसे करने में सुखी होता है और उसका समय बिताना प्रियतम होता है।
• सृजनात्मकता – अभिरुचि के साथ जुड़े व्यक्ति को सृजनात्मकता में विशेष रुचि होती है। वह नए, मनोहारी और अद्वितीय विचारों, कला, और रचनाओं को पैदा करने में रुचि रखता है।
• प्रगति – अभिरुचि के साथ जुड़े व्यक्ति को उसे प्रिय विषय में प्रगति होती है। वह नए कौशल और ज्ञान को प्राप्त करता है और उसकी क्षमताएं विकसित होती हैं।
इन सभी विशेषताओं के साथ, अभिरुचि एक व्यक्ति को सृजनात्मक, समर्पित, स्वतंत्र, आनंदमय, संपन्न, और प्रगतिशील बनाती है।

14. बच्चों के खेल की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – बच्चों के खेल की विशेषताएँ निम्नलिखित हो सकती हैं :
• रंगीनता – बच्चों के खेल आमतौर पर रंगीन होते हैं। वे उपयोग करने के लिए विभिन्न रंगीन खिलौने, पेंसिल, मोहरे, क्रियात्मक गतिविधियाँ, आदि पसंद करते हैं।
• सामूहिकता – बच्चों के खेल आमतौर पर सामूहिक होते हैं। इनमें समुदाय में साझा करने, सहयोग करने, संगठित होने, टीम में काम करने, आदि के मूल्य सिद्ध होते हैं।
• सोच-समझ – बच्चों के खेल सोच-समझ को विकसित करने में मदद करते हैं। वे समस्याओं का समाधान करने, लॉजिकल सोच का विकास करने, रणनीति बनाने, आदि को प्रोत्साहित करते हैं।
• शारीरिक गतिविधि – बच्चों के खेल शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं। वे बच्चों के शारीरिक विकास, स्थैर्य, सहनशक्ति, सहनशीलता, आदि में मदद करते हैं।
• खुशी और मनोरंजन – बच्चों के खेल खुशी, मनोरंजन, और मस्ती का साधन होते हैं। इनमें बच्चे स्वतंत्रता, सुख, और आनंद का अनुभव करते हैं।
• शिक्षाप्रदता – बच्चों के खेल उन्हें अन्य कौशल, जैसे कि संख्याओं का ज्ञान, पत्र-लेखन, गणित, भूगोल, आदि की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।
• स्वतंत्रता – बच्चों के खेल उन्हें स्वतंत्रता का महत्व सिखाते हैं। वे अपनी पसंद के अनुसार खेल सकते हैं, खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकते हैं, और नियमों को समझकर उनका पालन कर सकते हैं।
इन सभी विशेषताओं के साथ, बच्चों के खेल मनोरंजनपूर्ण, शिक्षाप्रद, स्वास्थ्यप्रद, और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण साधन होते हैं।

15. ‘भाषा’ से क्या अभिप्राय है ? भाषा की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर – भाषा एक माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं और ज्ञान को अभिव्यक्त करता है। इसके द्वारा मनुष्य संकेतों, शब्दों, और वाक्यों का उपयोग करके अपने मन की बातें दूसरों को समझा सकता है। भाषा मनुष्यों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण साधन है और साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक, और आध्यात्मिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भाषा की निम्नलिखित विशेषताएं हैं :
• संवेदनशीलता – भाषा में संवेदनशीलता की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से व्यक्ति की भावनाओं, विचारों, और अनुभवों को साझा करने का माध्यम होती है।
• संरचना – भाषा में संरचना की विशेषता होती है। यह भाषा के नियम, ग्रामर, और वाक्य संरचना के माध्यम से समझने और संवाद करने की क्षमता प्रदान करती है।
• संक्षेप – भाषा में संक्षेप की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से बहुत सारी जानकारी को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता प्रदान करती है।
• व्याप्ति – भाषा में व्याप्ति की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से व्यक्ति की बातचीत को अलग-अलग समय, स्थान, और सामरिक परिस्थितियों में संभव बनाती है।
• समझने की क्षमता – भाषा में समझने की क्षमता की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से आपसी संवाद को समझने, विचारों को समझने, और ज्ञान को प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करती है।
• संबंध – भाषा में संबंध की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से व्यक्ति के बीच संबंध को स्थापित करने, संघर्षों को हल करने, और सहयोग करने की क्षमता प्रदान करती है।
• सांस्कृतिक आदान-प्रदान – भाषा में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक, और ऐतिहासिक ज्ञान को संजोया, प्रस्तुत, और समझने की क्षमता प्रदान करती है।
• समर्थन – भाषा में समर्थन की विशेषता होती है। यह भाषा के माध्यम से व्यक्ति को समर्थन, प्रोत्साहन, और प्रभावित करने की क्षमता प्रदान करती है।
भाषा व्यक्ति के माध्यम से विचारों, भावनाओं, और ज्ञान को साझा करने, संवाद करने, और संबंध स्थापित करने की महत्वपूर्ण साधन है।

16. ‘सम्प्रत्यय’ किसे कहते हैं ? सम्प्रत्यय निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – सम्प्रत्यय (Concept) एक भाषा विज्ञानीय शब्द है जो व्यक्ति के विचारों, भावनाओं, और अनुभवों को साझा करने और समझने की क्षमता को दर्शाता है।
सम्प्रत्यय निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हैं :
• संवेदनशीलता – संवेदनशीलता की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। जब भाषा में संवेदनशीलता होती है, तो व्यक्ति की भावनाएं और अनुभव सही ढंग से संप्रत्यय में प्रकट होते हैं।
• संरचना – संरचना की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। भाषा के नियम, ग्रामर, और वाक्य संरचना के माध्यम से सम्प्रत्यय को सही ढंग से व्यक्त किया जा सकता है।
• संक्षेप – संक्षेप की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। भाषा के माध्यम से बहुत सारी जानकारी को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने से सम्प्रत्यय को समझने में आसानी होती है।
• समझने की क्षमता – समझने की क्षमता की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। जब भाषा में समझने की क्षमता होती है, तो सम्प्रत्यय को सही ढंग से समझा जा सकता है और उसका प्रभाव अच्छी तरह से होता है।
• संबंध – संबंध की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। भाषा के माध्यम से संबंध को स्थापित करने, संघर्षों को हल करने, और सहयोग करने के लिए सम्प्रत्यय महत्वपूर्ण होता है।
• सांस्कृतिक आदान-प्रदान – सांस्कृतिक आदान-प्रदान की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। भाषा के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक, और ऐतिहासिक ज्ञान को संजोया, प्रस्तुत, और समझने के लिए सम्प्रत्यय महत्वपूर्ण होता है।
• समर्थन – समर्थन की विशेषता होने से सम्प्रत्यय प्रभावित होता है। भाषा के माध्यम से समर्थन, प्रोत्साहन, और प्रभावित करने के लिए सम्प्रत्यय महत्वपूर्ण होता है।
ये सभी कारक सम्प्रत्यय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण होते हैं और इसकी सही व्याख्या करने में मदद करते हैं।

अथवा

‘अधिगम असमर्थता’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए। अधिगम असमर्थ बच्चों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – अधिगम असमर्थता (Learning Disability) एक मनोवैज्ञानिक शब्द है जो एक व्यक्ति की असमर्थता को व्यक्त करता है जो नई जानकारी को समझने या स्वीकार करने में कमी होती है। यह अवस्था उन लोगों के लिए हो सकती है जिनमें मनोवैज्ञानिक क्षमता, संचार क्षमता, संकल्पना क्षमता, और समस्या समाधान क्षमता में कमी होती है।
अधिगम असमर्थ बच्चों की विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं :
• समझने में कठिनाई – अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों को नई जानकारी को समझने में कठिनाई होती है। वे ज्ञान को समस्यापूर्ण और अस्पष्ट ढंग से समझते हैं और इसे अपने मन में संग्रहीत नहीं कर पाते हैं।
• सीखने में कमी – अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों को नई जानकारी को सीखने में कमी होती है। वे ज्ञान को स्वीकार करने में समस्या होती हैं और इसे अपने दिमाग में संग्रहीत करने में कठिनाई होती है।
• व्यक्तिगत प्रगति में कमी – अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों की व्यक्तिगत प्रगति में कमी होती है। वे नई जानकारी को समझने और स्वीकार करने में महारूप समय लेते हैं और इसके कारण उनकी शिक्षा में धीमी प्रगति होती है।
• संवेदनशीलता की कमी – अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों में संवेदनशीलता की कमी होती है। वे नई जानकारी को समझने और स्वीकार करने में कठिनाई होती है और इसके कारण उन्हें अपने भावनाओं को सही ढंग से व्यक्त करने में समस्या होती है।
• संक्षेप में कमी – अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों में संक्षेप की कमी होती है। वे नई जानकारी को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने में कठिनाई होती है और इसके कारण उनका संप्रत्यय समझने में कठिनाई होती है।
इन विशेषताओं के कारण, अधिगम असमर्थता से प्रभावित बच्चों को अतिरिक्त मदद और समर्थन की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें ज्ञान को समझने और सीखने में सहायता मिल सके।

17. ‘स्मृति’ से आप क्या समझते हैं ? स्मृति की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर – स्मृति (Memory) शब्द संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है- ‘याद’। स्मृति एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें हम अपने मन में संग्रहीत जानकारी को याद करते हैं। यह प्रक्रिया मनुष्य की सोच, समझ, और अनुभव के आधार पर होती है।
स्मृति की प्रक्रिया में चार मुख्य चरण होते हैं :
• संग्रहीति (Encoding) – इस चरण में, हम नई जानकारी को संग्रहीत करते हैं और मन में स्थानांतरित करते हैं। इसके लिए हम ज्ञान, अनुभव, और संवेदना का उपयोग करते हैं।
• संचारण (Storage) – इस चरण में, संग्रहीत जानकारी को मन में संचारित किया जाता है और उसे स्थायी रूप से स्मृति में सुरक्षित किया जाता है। यहाँ जानकारी को स्मृति में संग्रहित करने के लिए हमारे मस्तिष्क के विभिन्न भागों का उपयोग होता है, जैसे कि हिप्पोकैम्पस, नीलाम्बर, और कोर्टेक्स।
• पुनरुद्धारण (Retrieval) – इस चरण में, हम संग्रहीत जानकारी को पुनः याद करते हैं और मन में प्रकट करते हैं। यह प्रक्रिया हमें पहले संग्रहीत जानकारी को याद करने और उसे उपयोग करने में मदद करती है।
• भूल (Forgetting) – यह चरण स्मृति प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार हम संग्रहीत जानकारी को भूल जाते हैं या उसे सही ढंग से याद नहीं कर पाते हैं। भूल के कारण हमें स्मृति की समस्या हो सकती है।
स्मृति प्रक्रिया मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके माध्यम से हम अपने पिछले अनुभवों से सीखते हैं, नई जानकारी प्राप्त करते हैं, और समस्याओं का समाधान करते हैं।

अथवा

‘विस्मरण’ क्या है ? विस्मरण के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – विस्मरण (Forgetting) एक हिन्दी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘भूलना’ या ‘याद नहीं रखना’। जब किसी व्यक्ति को किसी चीज़, व्यक्ति, जगह या अनुभव का स्मरण(याद) नहीं रहता है, तो हम उसे ‘विस्मरण’ कहते हैं।
विस्मरण के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं :
• असंगत ध्यान – जब हम किसी काम में लगे होते हैं और ध्यान भटकता है, तो उस समय हम स्मरण शक्ति खो सकते हैं और विस्मरण हो सकता है।
• मनोरोग (मानसिक समस्याएं) – कई मानसिक समस्याएं जैसे तनाव, चिंता, भ्रम, दिमागी कमजोरी आदि विस्मरण का कारण बन सकती हैं। ये समस्याएं हमारी स्मरण शक्ति को प्रभावित करके स्मरण क्षमता कम कर सकती हैं।
• उम्र का प्रभाव – जैसे हम बढ़ती उम्र में होते हैं, हमारी स्मरण शक्ति समय-समय पर कम हो सकती है। विस्मरण के पीछे ये उम्र का प्रभाव भी हो सकता है।
• अभ्यास की कमी – जैसे हम किसी क्षेत्र में अभ्यास नहीं करते हैं, उस समय हम बातों को जल्दी भूल जाते हैं। अभ्यास की कमी भी विस्मरण का मुख्य कारण हो सकती है।
ध्यान देने वाली बात है कि विस्मरण काफी सामान्य है और आम बात है। लेकिन कभी-कभी अधिक विस्मरण सामान्य नहीं हो सकता है और इनफोर्मेशन या यादें या घटनाएं भूल जाती हैं। यदि आपको इस समस्या से संबंधित चिंता है, तो दैनिक योगाभ्यास, मेमोरी गेम खेलना, स्वस्थ आहार खाना और अभ्यास करना उपयोगी हो सकता है।

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