DELED Cognition, Learning and the Socio-Cultural Context Important Questions

DELED/JBT/BSTC Important Questions
(Course Code-201, 2nd Year)

Cognition, Learning & the Socio-Cultural Context
संज्ञान, अधिगम तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ

प्रत्यक्षीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – इन्द्रियों के द्वारा बाह्रा वस्तु अथवा घटना का ज्ञान प्राप्त करने की क्रिया को प्रत्यक्षीकरण कहते हैं। प्रत्यक्षीकरण (Perception) से मनुष्य के अंतरंग स्थितियों, भावनाओं, और भावों को समझने का तरिका है। इसके माध्यम से हम अपने मन की स्थिति और भावनाएं पहचान सकते हैं और उन्हें व्यक्त कर सकते हैं। प्रत्यक्षीकरण हमें अपने आप को समझने में मदद करता है और हमारी संवेदनाओं, प्रवृत्तियों, आचरणों, और प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करता है। यह हमें अपने सामाजिक, मानसिक, और आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायता प्रदान करता है।

अभिरुचि क्या है ?
उत्तर – अभिरुचि एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘रुचि’ या ‘प्रेम’। अभिरुचि (Aptitude) एक व्यक्ति की प्राथमिकताओं, पसंदों, और रुचियों की प्रतिक्रिया होती है। यह उसके मन की स्थिति और भावनाओं का प्रतिबिंब है और उसके द्वारा पसंद की गई चीजों और गतिविधियों के प्रति उसकी आकर्षण को प्रकट करती है। अभिरुचि व्यक्ति के स्वाभाविक हित की ओर प्रेरित करती है और उसे संतुष्टि और सुख महसूस कराती है। यह उसके सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, और साधारण जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मातृभाषा किसे कहते हैं ?
उत्तर – मातृभाषा एक व्यक्ति की जन्मभूमि या मातृस्थान की भाषा होती है। यह वह भाषा होती है जिसे एक व्यक्ति अपने माता-पिता या परिवार के सदस्यों से सीखता है और पहली बार में बोलना शुरू करता है। मातृभाषा (Mother Tongue) एक व्यक्ति की भाषा संचार की मुख्य और प्रमुख शक्ति होती है और उसे अपने विचारों, भावनाओं, और अनुभवों को व्यक्त करने का माध्यम प्रदान करती है। मातृभाषा समाजिक, सांस्कृतिक, और पाठशाला के संदर्भ में महत्वपूर्ण होती है और व्यक्ति की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

शाब्दिक सम्प्रेषण क्या है ?
उत्तर – शाब्दिक सम्प्रेषण भाषा के माध्यम से विचारों, भावनाओं, और अनुभवों को अभिव्यक्ति करने की प्रक्रिया है। इसमें शब्द, वाक्य, और भाषा के नियमों का प्रयोग किया जाता है ताकि संदेश स्पष्टता से समझ में आ सके। शाब्दिक सम्प्रेषण (Verbal Communication) मनुष्यों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सामान्यतः बोली और लिखी भाषा के माध्यम से किया जाता है।

दूर संवाद प्रणाली क्या है ?
उत्तर – दूर संवाद प्रणाली एक तकनीकी प्रणाली है जिसका उपयोग विभिन्न स्थानों के बीच संवाद करने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली में, आप शब्द, ध्वनि, छवि, और अन्य माध्यमों का उपयोग करके अपने विचारों, भावनाओं, और अनुभवों को दूसरे व्यक्ति को संचारित कर सकते हैं। इसमें ईमेल, टेलीफोन, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, आदि शामिल हो सकते हैं। दूर संवाद प्रणाली (Tele Conferencing) मानव संवाद को सुगम, तेज, और सुरक्षित बनाने का माध्यम प्रदान करती है।

भाषा विकास में अनुकरण की क्या भूमिका है ?
उत्तर – भाषा विकास में अनुकरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विचारों, भावनाओं, और अनुभवों को संचारित करने का माध्यम है और संवाद को सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद करता है। जब हम किसी व्यक्ति के साथ संवाद करते हैं, तो हम उनकी भाषा, शैली, और संकेतों का अनुकरण (imitation) करते हैं ताकि हमारा संदेश सही ढंग से समझा जा सके। इसके साथ ही, भाषा अनुकरण हमें समाजिक समझ में मदद करता है और हमें संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है। इसलिए, अनुकरण भाषा विकास (Language Development) के लिए महत्वपूर्ण है।

सम्प्रेषण की लोकतांत्रिक शैली क्या है ?
उत्तर – सम्प्रेषण की लोकतांत्रिक शैली (Democratic Pattern) एक ऐसी शैली है जो सामान्यतः लोगों के बीच संवाद करते समय प्रयुक्त होती है। इस शैली में संवादकार ने अपने विचारों, भावनाओं, और विचारों को स्पष्ट और सुलभ ढंग से संवेदित करने का प्रयास किया होता है। सम्प्रेषण (Communication) की लोकतांत्रिक शैली में, संवादकार संवाद के माध्यम से अपने विचारों को प्रस्तुत करता है, लेकिन उनके साथी संवादकों के विचारों का महत्वपूर्ण सम्मान करता है और उनके मतभेदों को समझता है। इस शैली में संवादकों के बीच समानता, सम्मान, और सहयोग का माहौल बनाया जाता है। यह शैली लोगों के बीच संवाद को सुगम, सुरक्षित, और उपयोगी बनाने में मदद करती है।

बुद्धि क्या है ?
उत्तर – बुद्धि एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘बुद्धिमान’ या ‘बुद्धिशाली’। बुद्धि (Intelligence) एक ज्ञान, विवेक और समझ की सामर्थ्य है। यह मानसिक क्षमता है जो हमें चीजों को समझने, सोचने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने में मदद करती है। बुद्धि हमारे जीवन में स्वाधीनता, स्वयंसेवकता और समाधान का महत्वपूर्ण एकंश है। इसके माध्यम से हम अच्छे निर्णय ले सकते हैं और अपने कर्तव्यों को पूरा कर सकते हैं।

स्वराघात से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – मानव द्वारा अपने विचारों, भावों को दूसरों पर प्रकट करने के लिए मुख से विभिन्न प्रकार की ध्वनियों का उच्चारण किया जाता है। ये ध्वनियाँ वर्ण, शब्द या वाक्यों के रूप में होती हैं। जब एक व्यक्ति विचार प्रकट करने के लिए अपने मुख से उच्चारण करता है तब अपने मन की बात (भाव) का स्पष्ट और उचित अर्थ प्रदान करने के लिए कुछ-कुछ किसी विशेष वर्ण (अक्षर/ध्वनि), शब्दों या वाक्य पर जोर (बल) दिया जाता है। इसी जोर देने की क्रिया को ही ‘बलाघात’ या ‘स्वराघात’ (Accent) कहा जाता है।

शारीरिक भाषा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर – शारीरिक भाषा (Body Language), अमौखिक संचार का एक रूप है जिसे शरीर की मुद्रा, चेहरे की अभिव्यक्ति, इशारों और आँखों की गति के द्वारा व्यक्त किया जाता है। हम इनमें से अधिकतर सिग्नल अवचेतन रूप से भेजते हैं। विशेष रूप से भावनात्मक स्थितियों में जब हम खुश, डरे हुए, क्रोधित या दुखी होते हैं तो इसे छिपाना लगभग असंभव होता है।

भाषा विकास में बलबलाना क्या है ?
उत्तर – बलबलाना (Babbling) एक भाषा विकास की प्रक्रिया है जिसमें बच्चा मातृभाषा सीखते समय शब्दों के ध्वनियों को बदल देता है। यह ध्वनियों के जिन्हें बच्चा सही ढंग से उच्चारण नहीं कर पा रहा होता है, के बदले में उसके द्वारा सहजता से उच्चारित किए जाने वाले ध्वनियों को उपयोग करना है। इस प्रक्रिया के द्वारा बच्चा अपनी मातृभाषा को सही ढंग से बोलना सीखता है। यह एक सामान्य भाषा विकास का पहला चरण होता है जो बच्चे को शब्दों के सही उच्चारण की अवधारणा कराता है।

द्विभाषी बच्चे कौन-से होते हैं ?
उत्तर – द्विभाषी बच्चे वे बच्चे होते हैं जो दोनों मातृभाषा और पितृभाषा का ज्ञान रखते हैं और उन्हें दोनों भाषाओं में संवाद करने की क्षमता होती है। इसे अक्सर परचलित शब्दों से द्विभाषी या बिलिंग्विल (Bilingual) कहा जाता है।

सम्प्रेषण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – सम्प्रेषण का अर्थ एक सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, बौद्धिक, या कला अथवा विज्ञान से सम्बंधित संकल्प, विचार, भावना, या संदेश का आदान प्रदान करने की क्रिया होती है। सम्प्रेषण कई रूपों में घट सकता है, जैसे कि शब्द, आवाज, लिखित वाक्य, पिक्चर, चित्र, वीडियो, टेक्स्ट, या कंप्यूटर कोड के माध्यम से। सम्प्रेषण (Communication) का उद्देश्य संदेश को अन्य व्यक्तियों तक पहुँचाना होता है ताकि संदेश के साथी इसे समझ सके, प्रतिक्रिया कर सके, या इस पर कार्रवाई कर सके।

संज्ञान से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – संज्ञान मनुष्य के मन और इंद्रियों के माध्यम से होने वाला ज्ञान है। यह मानव की समझने, अनुभव करने और जगत को जानने की क्षमता है। संज्ञान (Cognition) द्वारा हम आस-पास के पर्यावरण के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, और इसका उपयोग करके नई बातें सीखते हैं। संज्ञान हमें विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करता है और हमें जीवन के निर्धारण करने में मदद करता है।

विस्मरण क्या है ?
उत्तर – विस्मरण (Forgetting) एक हिन्दी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘भूलना’ या ‘याद नहीं रखना’। जब किसी व्यक्ति को किसी चीज़, व्यक्ति, जगह या अनुभव का स्मरण(याद) नहीं रहता है, तो हम उसे विस्मरण कहते हैं।

अनौपचारिक सम्प्रेषण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – जब किसी समारोह, सभा या सम्मेलन के दौरान बिना पहले तैयारी के या सामान्यतः मन को नहीं लगाए हुए कोई बात कही जाती है, तो उसे अनौपचारिक सम्प्रेषण (Informal Communication) कहा जाता है। ऐसे सम्प्रेषण को अक्सर भाषण, कविता, कहानी, एक्ट या रचनात्मक प्रस्तुति के रूप में किया जाता है। यह अवसर सम्प्रेषित करने वाले व्यक्ति द्वारा साधारणतः अपनी भावनाओं को व्यक्त करने, संदेश प्रसारित करने या अभिनय करने का मुख्य माध्यम होता है। अनौपचारिक सम्प्रेषण आमतौर पर अधिक अनुप्रयोगिक, मनोरंजक या सर्वसाधारण होता है।

श्रवण कौशल क्या है ?
उत्तर – बोलने सुनने और सुनकर उसका अर्थ एवं भाव समझने की क्रिया को श्रवण कौशल (Listening Skill) कहा जाता है। श्रवण कौशल का सैद्धान्ति पक्ष ध्वनि विज्ञान के अंतर्गत दिया जाता है। सामान्यतः कानों द्वारा जो ध्वनियाॅं ग्रहण की जाती है और मस्तिष्क द्वारा उनकी अनुभूति तथा प्रत्यक्षीकरण को श्रवण कहते है। मौखिक भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भाव एवं विचारों को सुनकर समझना। भाषा के संदर्भ में अर्थ बोध एवं भाव की प्रतीति सुनने के आवश्यक तत्व होते है। इस प्रकार जब कोई व्यक्ति हमारे सामने अपने भाव एवं विचार मौखिक भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त करता है और हम उसे सुनकर यथा भाव एवं विचार समझते और ग्रहण करते है तो हमारी यह क्रिया सुनना अथवा श्रवण कहलाती है यह बात दूसरी है कि हम यथा भाव एवं विचार किस सीमा तक समझते और ग्रहण करते है।

बारी लेने का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – एक ‘बारी’ (Turn) वह समय होता है जब कोई स्पीकर बोल रहा होता है और बारी-लेने (Turn-Taking) यह जानने का कौशल है कि वार्तालाप में ‘बारी’ को कब शुरू किया जाये और कब संपन्न किया जाये। किसी भी बोले गये वार्तालाप कार्य में यह एक महत्त्वपूर्ण संगठनात्मक उपकरण (Tool) होता है। टर्न टेकिंग सामान्यतः वार्तालाप में एक अवलोकित प्रक्रम है। इसमें एक पार्टी वार्ता करती है, जबकि दूसरे सुनते हैं। इसका वर्णन और विश्लेषण एक महत्त्वपूर्ण समस्या है जिसका उपचार भाषा के व्यवहारवाद में किया गया है।
उदाहरणार्थ- किसी टर्न या बारी के समाप्त होने का संकेत स्पीकर या बोलने वाला व्यक्ति अपनी आवाज की ‘पिच’ (Pitch) या वॉल्यूम (Volume) को अपने कथन के अंत में धीमा कर देता है। कक्षा-कक्ष में कई विधियां हैं जिनके द्वारा स्पीकर बारी-लेने की प्रक्रिया की व्यवस्था कई प्रकार से करते हैं। ये विधियां विभिन्न संस्कृतियों में भिन्न होती है। शारीरिक भाषा और हाव-भावों का भी प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार कई बार ‘आप जानते हैं (You know), आह (Ah) आदि शब्दों का प्रयोग भी करते हैं। भाषा शिक्षण में व्याकरण संरचाएं, उच्चारण आदि का शिक्षण कराया जाता है।

सामाजिक अधिगम सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर – सामाजिक अधिगम सिद्धान्त (Social Learning Theory) एक सामाजिक विज्ञानिक सिद्धांत है जो समाज के अध्ययन पर आधारित है। यह सिद्धांत समाजी व्यवहार, संगठन, संरचना, संघटन, व्यक्तियों के बीच संबंध और समाज के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए उपयोगी सिद्धांतों का अध्ययन करता है। इसके माध्यम से हम समाज के निर्माण, विकास और परिवर्तन के प्रक्रियाओं को समझ सकते हैं।

बोली क्या है ?
उत्तर – एक क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली भाषा का विशिष्ट रूप बोली कहलाता है। अर्थात छोटे से कस्बे या क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा बोली कहलाती है। बोली (Dialect) का साहित्य लिखित न होकर मौखिक ही रहता है इसकी लिपि नहीं होती है।

अवधान क्या है ?
उत्तर – अवधान का अर्थ होता है ‘सतर्क’ या ‘चौकस’। यह शब्द किसी व्यक्ति या स्थिति के लिए जागरूकता और सतर्कता की भावना को व्यक्त करता है। किसी वस्तु अथवा विचार आदि पर चेतना को केन्द्रित करने की मानसिक प्रक्रिया को अवधान या ध्यान कहते हैं। अवधान (Attention) विचार की किसी वस्तु को मस्तिष्क के सामने स्पष्ट रूप से उपस्थित करने की प्रक्रिया है।

स्मृति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – स्मृति (Memory) शब्द संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है- ‘याद’। स्मृति एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें हम अपने मन में संग्रहीत जानकारी को याद करते हैं। यह प्रक्रिया मनुष्य की सोच, समझ, और अनुभव के आधार पर होती है।

कथावाचन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर – कथा वाचन (Story-telling) को वाचन का बहुत उचित लक्षण माना जाता हैं, जिसका उपयोग शिक्षण की एक विधि के रूप में भी किया जा सकता है। बच्चे ​साहित्य के माध्यम से जीवन के कई पक्षों व आयामों को देख, समझ व महसूस कर पाते हैं जिन्हें वह प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं पाते हैं। यह बच्चो में तार्किक समझ और कल्पनाशीलता का विकास करती है।

औपचारिक सम्प्रेक्षण क्या है ?
उत्तर – औपचारिक सम्प्रेषण का आशय किसी संस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों के मध्य विचारों, तथ्यों, सूचनाओं के आदान-प्रदान से होता है। औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication) का मार्ग निश्चित होता है। औपचारिक संचार आधिकारिक तौर पर सूचना के आदान-प्रदान को संदर्भित करता है। संचार के प्रवाह को नियंत्रित किया जाता है और यह एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। यह जानकारी को बिना किसी बाधा के, थोड़ी लागत और उचित तरीके से वांछित स्थान तक पहुंचने के लिए संभव बनाता है।

मानक भाषा किसे कहते हैं ?
उत्तर – वह भाषा जो एक निश्चित पैमाने के अनुसार गठित की गयी हो तथा उस भाषा का व्याकरण भी हो उसे मानक भाषा कहते है। मानक भाषा अपने व्याकरण के अनुसार लोगों द्वारा बोली, पढ़ी व लिखी जा सकती है। लोगों द्वारा प्रतिदिन के काम में ली जाने वाली वह भाषा, मानक भाषा (Standard language) कहलाती है। स्कूल में जब कोई अध्यापक किसी विद्यार्थी से प्रश्न पूछता है तथा विद्यार्थी उस प्रश्न का उत्तर बताता है तो यह बोल चाल की भाषा एक मानक भाषा ही है। मानक भाषा का एक निश्चित पैमाना उसकी व्याकरण है जो गठित की हुई है। मानक भाषा का प्रयोग किताबों, पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं व लेखन कार्य में किया जाता है।

बहुभाषिता क्या है ?
उत्तर – बहुभाषिता से तात्पर्य एक से अधिक भाषाओं के प्रयोग से है। किसी व्यक्ति अथवा समुदाय द्वारा दो या दो से अधिक भाषाओं का प्रयोग बहुभाषिता (Multilingualism) कहलाता है। यह बहुभाषिता विभिन्न स्तर पर हो सकती है। कुछ लोग लिखने, बोलने या पढ़ने में दो या अधिक भाषाओं का प्रयोग कर लेते हैं, भले ही भाषाओं के दक्षता में बहुत अन्तर हो। इसी प्रकार कुछ लोग अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा बोले जाने पर उसका अर्थ तो समझ लेते हैं, परंतु वे स्वयं बोल नहीं पाते। यह सभी बहुभाषिता के अन्तर्गत आता है। ऐसे सभी लोग बहुभाषिक हैं जो एक से अधिक भाषाओं को सुनकर समझने, बोलने, पढ़ने या लिखने में से किसी भी स्तर पर अपनी दक्षता रखते हैं।

 

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