DELED Childhood and Development of Children Important Questions

DELED/JBT/BSTC Important Questions 2023 
(Course Code-101, 1st Year)

Childhood and Development of Children
बाल्यावस्था तथा बालकों का विकास 

कुंठा किसे कहते हैं ?
उत्तर – जब किसी व्यक्ति के मन में कुछ पाने की तीव्र उत्कंठा हो, परंतु उसे प्राप्त करने की शक्ति अथवा परिस्थिति न हो अथवा प्रारब्ध आदि कारणों से उसकी इच्छा अपूर्ण रह जाए तब मन के भीतर जिस घुटन, बेचैनी या झुंझलाहट का आगाज होता है, वही कुंठा कहलाती है। कुण्ठा (Frustration) एक ऐसी मानसिक व भावात्मक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अंसतोष का भाव महसूस करता है और नकारात्मक हो जाता है।

खेल क्या है ?
उत्तर – खेल एक मनोरंजन की गतिविधि होती है जिसमें एक या अधिक व्यक्ति या समूह द्वारा नियमों और प्रतियोगिता के माध्यम से भाग लिया जाता है। खेलों के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कौशलों का विकास होता है। खेल (Play) एक संघर्ष, मनोरंजन, स्वास्थ्य, सामरिक, सामाजिक या मानसिक मुद्दे के साथ जुड़ा हो सकता है।

विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – विशिष्ट (Exceptional) बच्चों की श्रेणी में वे बच्चे आते हैं जिन्हें सीखने में कठिनाई का अनुभव होता है या जिनमें मानसिक या शैक्षिक निष्पादन या सृजन अत्यन्त उच्चकोटि का होता है या जिनको व्यावहारिक, सांवेगिक एवं सामाजिक समस्याएँ घेर लेती हैं या वे विभिन्न शारीरिक अपंगताओं या निर्बलताओं से पीड़ित रहते हैं, जिनके कारण ही उनके लिए अलग से विशिष्ट शिक्षा की व्यवस्था करनी पड़ती है। इन बच्चों को समय-समय पर संगठनित गतिविधियों, जैसे कि खेल, कार्यक्रम और संगठन से जुड़े होने का मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा, इन बच्चों को सामाजिक संपर्कों, सहयोग, स्वास्थ्य सुधार, मनोवैज्ञानिक लाभ, और स्वतंत्रता के महत्व को समझाने के लिए मौका मिलना चाहिए। इन बच्चों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सही मार्गदर्शन, समर्थन और संबंधों की जरूरत होती है।

सामाजिक व्यवहार क्या है ?
उत्तर – सामाजिक व्यवहार (Social Behaviour) एक व्यक्ति के सामाजिक मानदंडों, नियमों, और संगठन के अनुसार उनके साथी, परिवार, और समुदाय के साथ संचालित किए जाने वाले क्रियाओं का होता है। इसमें संवेदनशीलता, सहयोग, संघटना, और संबंधों का महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सामाजिक व्यवहार में समानता, सम्मान, और समरसता को प्रमुखता दी जाती है ताकि समुदाय के सदस्यों के बीच संबंध मजबूत हो सकें।

‘निरीक्षण’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के लिए अपनायी जाने वाली एक मुख्य विधि निरीक्षण विधि (Observation Method) भी है। यह विधि मनोविज्ञान एक महत्त्वपूर्ण विधि है। निरीक्षण का अर्थ है- “घटनाओं का बारीकी और क्रमबद्ध तरीके से अवलोकन करना”। अन्य शब्दों में कह सकते है; देखकर तथा सुनकर काम करने अथवा किसी निष्कर्ष तक पहुँचने की विधि को निरीक्षण कहते हैं। निरीक्षण विधि के अन्तर्गत व्यक्ति अथवा किसी अन्य प्राणी के व्यवहार का ज्ञान केवल उसके बाहरी क्रियाकलापों को देखकर ही प्राप्त किया जा सकता है।

‘भावना’ को परिभाषित करें।
उत्तर – ‘भावना’ एक अनुभूति, भाव, या मनोभावना को संकेत करने वाला शब्द है। यह व्यक्ति के मन की स्थिति, भावनाएं, और भावों को व्यक्त करने का एक तरीका है। भावना (Feeling) मनुष्य के अंतरंग स्थितियों, संवेदनाओं, और भावों को समझने में मदद करती है और उसकी प्रवृत्तियों, आचरणों, और प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करती है। भावना मनुष्य के सामाजिक, मानसिक, और आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से हम अपने भावों को व्यक्त करते हैं, उन्हें समझते हैं, और दूसरों के साथ संवाद करते हैं।

क्रियात्मक-कौशलों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – क्रियात्मक-कौशले (Motor Skill), वे कौशल होते हैं जो किसी व्यक्ति की क्रियाओं, कामकाज या कौशल के साथ संबंधित होते हैं। ये कौशल किसी न किसी दक्षता या निपुणता की प्रतिष्ठा करने में मदद करते हैं। इन कौशलों का माहिर होना किसी के करियर में महत्वपूर्ण हो सकता है और व्यक्ति के सामाजिक, व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन में समृद्धि ला सकते हैं। क्रियात्मक (गतिक) कौशल को उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके द्वारा क्रिया को अभ्यास के साथ अधिक तेज़ी से और सही तरीके से निष्पादित किया जाता है।

आक्रामकता क्या है ?
उत्तर – आक्रामकता (Aggression) शब्द, एक प्रकार की समस्या का प्रतिनिधित्व करता है। यह शब्द सार्वभौमिक शब्द है, जिसका अर्थ जानना अति आवश्यक है। आरनोल्ड बास के अनुसार, “आक्रामकता एक ऐसा व्यवहार है जो दूसरों को हानि या कष्ट पहुँचाता है।” कुछ ऐसी ही परिभाषा चैपलिन ने भी दी है, “आक्रामकता से अभिप्राय दूसरों के प्रति प्रहार करना या हानि पहुंचाना, अनादर करना, उपहास या दुर्भावपूर्ण आरोप लगाना, सख्त दण्ड देना या परपीड़क व्यवहारों में लगे रहना है।” अतः आक्रामकता एक ऐसा व्यवहार है, जिसमें दूसरों को नुकसान पहुँचाया जाता है।

वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – वैश्वीकरण का अर्थ- आज विश्व में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। ये परिवर्तन सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, तकनीकी तथा शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में दिखाई देता है। वास्तव में वैश्वीकरण विश्व के विभिन्न देशों में परस्पर अन्तः क्रिया (interaction) की प्रक्रिया है। यह अन्तः क्रिया विचारों, सामाजिक मूल्यों, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति तथा तकनीकी आदि सभी क्षेत्रों में हो रही है और इसका कारण है कि सूचना व तकनीकी के क्षेत्र में विकास।
वैश्वीकरण (Globalization) के संदर्भ में परिभाषा निम्नलिखित है-
नाइट के अनुसार, “वैश्वीकरण तकनीकी, वित्त, व्यापार, ज्ञान मूल्यों तथा विचारों की सीमा पार तक बढ़ते प्रवाह के साथ संबंध रखता है।”
लेचनर के अनुसार, “वैश्वीकरण का अर्थ है वैश्विक संबंधों का विस्तार, सामाजिक जीवन का विश्व स्तर पर संगठन तथा विश्व चेतना का विकास।”

रचनात्मक खेल को परिभाषित करें।
उत्तर – रचनात्मक खेल (Constructive Play) एक प्रकार का खेल है जिसमें खिलाड़ी की रचनात्मकता, तकनीक और आविष्कारी दक्षता का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य नए और अनोखे खेल के माध्यम से मनोरंजन का साधन बनाना होता है। रचनात्मक खेल में समान्य नियमों और उपायों के साथ खिलाड़ी को खुद के रचनात्मक रचना को प्रदर्शित करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है। इसमें अनुकंपा, कला, संगठनात्मकता और नवीनता की भावना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बाल्यावस्था से क्या समझते हैं ?
उत्तर – बाल्यावस्था (Childhood Stage) बालकों की वह अवस्था हैं, जिसमे छात्रों की स्मरण चेतना का विकास होता हैं। बाल्यावस्था को 6 से 12 वर्ष तक माना जाता हैं, जिसमें छात्र नवीन वस्तुओं के संबंध में जानने हेतु जिज्ञासु होते हैं। यह विकास की वह अवस्था होती है जिसमें बालक के व्यक्तित्व एवं चरित्र का विकास तीव्र गति से होता हैं।

पाठ्य-सामग्री क्रियाओं को परिभाषित करें।
उत्तर – पाठ्य-सामग्री क्रियाएं, दी गई जानकारी या सूचना के साथ विद्यार्थियों को सिखाने एवं समझाने के लिए निर्मित होती हैं। इन क्रियाओं के माध्यम से, विद्यार्थी नई ज्ञान या कौशल की प्राप्ति करते हैं। पाठ्य-सामग्री क्रियाएं (Co-curricular Activities) विषय-वस्तु पर ध्यान केंद्रित करती हैं और उसे विद्यार्थियों के सामर्थ्य और ज्ञानार्जन के स्तर पर पेश करती हैं। यह क्रियाएं सब्जेक्ट मैटर की अच्छी समझ, तकनीक और भौतिक अनुभव के माध्यम से प्रस्तुत की जाती हैं। पाठ्य-सामग्री क्रियाएं संबंधित अध्याय, पाठ या विषय के संपूर्ण धारावाहिकता को स्थापित करने के लिए व्यापक रूप से प्रयोग की जाती हैं।

अनुभूति को परिभाषित करें।
उत्तर – अनुभूति (Sensation) को एक अनुभव या अनुभाव के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह एक व्यक्ति के मन और शरीर की प्रतिक्रिया होती है जो उसे किसी विषय या घटना की ओर खींचती है। अनुभूति व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती है और उसे भावनाएं, भावनात्मकता, या उत्तेजना के रूप में जागृत कर सकती है। यह शब्द अक्सर खुशी, दुख, आनंद, डर, आश्चर्य आदि इमोशनल अवस्थाओं को दर्शाने के लिए उपयोग होता है। इसके साथ ही, यह भी दिखा सकता है कि व्यक्ति किसी क्रिया, व्यक्तित्व, आदि के बीच परस्परक्रिया कर रहा है और अपने अनुभवों और अनुभवों को बदलने का प्रयास कर रहा है।

संस्कृति से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर – संस्कृति (Culture) मनुष्यों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संस्कृति के माध्यम से हम अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को समझते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। संस्कृति हमें एक आपसी समझ, सहयोग और समरसता की भावना देती है।

बच्चे की पालन-पोषण प्रक्रिया क्या है ?
उत्तर – बच्चे की पालन-पोषण (Child Rearing Practice) प्रक्रिया उन्हें स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए संभालने, खिलाने-पिलाने, साफ-सफाई करने, उनकी शिक्षा और संप्रेषण, और उनकी सामाजिक और भावनात्मक विकास को समर्थन करने का कार्य होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ संतुलित आहार, प्रशिक्षण, और स्नेहमय और सुरक्षित मनोरंजन की प्राप्ति करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, उनका शिक्षा, स्वच्छता, समय-समय पर अध्यायन और खेलने का सही समय भी अनुकूलता के साथ बनाए रखना चाहिए। इस प्रक्रिया में माता-पिता, अभिभावकों और परिवार के सदस्यों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है, जो बच्चे के संपूर्ण विकास को समर्थन करते हैं।

हेटरोनोमस नैतिकता क्या है ?
उत्तर – हेटरोनोमस नैतिकता (Heteronomous Morality) एक नैतिक सिद्धांत है जो सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों या समुदायों द्वारा स्थापित किए जाते हैं। इसे जनसामान्य के नैतिक मानकों या नैतिक संकल्पों से भिन्न माना जाता है, क्योंकि यह समुदाय द्वारा निर्धारित किया गया होता है। इस प्रकार की नैतिकता में लोगों को समाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मानदंडों का पालन करना होता है और उनका व्यवहार उन नियमों के अनुसार होता है। हेटरोनोमस नैतिकता में नियमों और कानूनों का महत्व बहुत अधिक होता है, जो समाज द्वारा स्वीकारित किए जाते हैं।

परवरिश क्या है ?
उत्तर – परवरिश (Parenting) शब्द को विभिन्न सन्दर्भों में प्रयोग किया जाता है। मानव के सन्दर्भ में परवरिश बालक के जैविकीय माता-पिता के द्वारा की जाती है। इस परवरिश में सरकार तथा समाज भी अहम योगदान देते हैं। परवरिश किसी बालक को जन्म से प्रौढ़ावस्था तक खड़ा करने तथा उसे शिक्षित करने की एक प्रक्रिया है। यह सामान्यतः परिवार में माता-पिता द्वारा की जाती है। अतः परवरिश को हम दूसरे शब्दों में ऐसे की परिभाषित कर सकते हैं- प्राकृतिक माता-पिता द्वारा बच्चे का ध्यान रखकर पालन-पोषण और सुरक्षा करते हुए माता-पिता की भूमिका निभाना परवरिश कहलाता है।

जिज्ञासा से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर – जिज्ञासा या उत्सुकता, जानने की इच्छा को कहते हैं। इसका ज़ाहिर करने, जांच करने, और सीखने के व्यवहार में होता है। यह इंसान और बहुत सारे जानवरों का जन्मजात लक्षण है। वैज्ञानिक खोज और अन्य पढ़ाइयों के पीछे उत्सुकता एक प्रमुख वजह और ताक़त है। ज्ञान प्राप्त करने की आर्त भावना और किसी गुप्त भेद या समाचार का यथार्थ आशय समझने का लोभ भी जिज्ञासा की श्रेणी में आते हैं। जिज्ञासा (Curiosity) ही नित नई खोजों और अविष्कारों की जननी है। इतना ज्ञान का खज़ाना जो हमारे आसपास बिखरा पड़ा है, जिज्ञासा की बदौलत ही इकट्ठा हुआ है।

निर्धनता क्या है ?
उत्तर – निर्धनता (Poverty) एक सामाजिक-आर्थिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति या परिवार आवश्यक आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण गरीबी या आर्थिक अक्षमता में होते हैं। इससे लोग आवश्यक सुविधाओं की अनुपलब्धता, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं आदि में प्रभावित हो सकते हैं।

 

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